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भालचंद्र नेमाडे — सूक्ति व विचार

भालचंद्र नेमाडे के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। भालचंद्र नेमाडे के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“समाज में स्थित विभिन्न नगरीय तथा राजनैतिक संस्थाओं की अस्तित्व में स्थित व्यवस्था को अमान्य करना—यह विद्रोही साहित्य का लक्ष्य होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“उपन्यास का गद्य कविता के माध्यम तक जा सकता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“समीक्षा पूर्णतः निर्गुण रूप में एक व्यक्ति द्वारा साहित्यादि कलाओं पर किया गया चिंतन होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“उपन्यास की तुलना में कविता की उपेक्षा होती ही है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विकृत सामाजिक संदर्भ का साहित्य, आभासी और मनोरंजनवादी प्रवृत्तियों का पोषक होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“साहित्य का श्रेष्ठत्व लेखक के व्यक्तित्व से सिद्ध होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“बड़ों के लिए लिखने की अपेक्षा छोटों के लिए लिखना कभी भी अधिक सुखकारक होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“केवल साहित्यिक परिवेश से जन्मा विद्रोह हो तो वह सच्चा विद्रोह नहीं होता।”

— भालचंद्र नेमाडे

“समीक्षा साहित्य-भूमि से रस सींचनेवाला जीवंत शास्त्र है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“लिखना—यह एक अखंड प्रक्रिया है। और उसके लिए ज़िंदगी भर लिखते रहना ज़रूरी है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विद्रोही साहित्य के संबंध में एक विरोधाभास यह है कि जिन बातों का वह विध्वंस करता है, उन्हीं बातों को प्राप्त करने का वह प्रयास करता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विद्रोही साहित्य की शोकास्पद स्थिति यह है कि वह व्यक्तिवादी होता है, परंतु उसका आह्वान समूह को, जाति को, धर्म या वंश को होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“प्रतिबद्धता की अवधारणा लेखक सापेक्ष होती है, साहित्य और रसिक इन दो अन्य इकाइयों का प्रतिबद्धता से आनेवाला संबंध काफ़ी दूर का होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विद्रोही साहित्य का मूल्य सौंदर्यशास्त्रीय न होकर मनोवैज्ञानिक होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“साहित्य का अर्थ केवल ‘लिखा हुआ’ ऐसा न लेते हुए ‘पढ़ा हुआ’ ऐसा अगर लें तो साहित्य-प्रक्रिया का अधिक व्यापक सामाजिक कार्य ध्यान में आएगा।”

— भालचंद्र नेमाडे

“समीक्षा परावलंबी साधन है, इसका एहसास रखना ज़रूरी है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“जिस प्रकार की संस्कृति होती है, उसके अनुरूप ही विद्रोही-साहित्य उसमें निर्मित होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“सामाजिक जीवन में कुछ तो बिगड़ा हुआ है, इसे विद्रोही आंदोलन दर्शाता है। विद्रोही साहित्य के द्वारा उस बीमारी का निदान किया जा सकता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विद्रोही साहित्य का प्राय: तात्कालिक महत्त्व होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“उपन्यास व्यापक भाषिक अवकाश से संबंधित साहित्यिक विधा है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“समीक्षा लिखना—यह साहित्य में मुफ़्तख़ोरी की क्रिया है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विद्रोही साहित्य की जड़ें असाहित्यिक व्यवस्था में होती हैं।”

— भालचंद्र नेमाडे

“प्रत्येक युग में सत्ताधारी वर्ग के मूल्यों का प्रभुत्व समाज में संतुलन साधता रहता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“पुस्तक की श्रेष्ठता केवल पुस्तक पर निर्भर नहीं होती।”

— भालचंद्र नेमाडे

“किसी भी बात की स्पिरिट महत्त्वपूर्ण होती है, फ़ॉर्म नहीं।”

— भालचंद्र नेमाडे

“विद्रोही साहित्य प्राय: अल्पसंख्यकों के एहसासों से निर्मित होता है।”

— भालचंद्र नेमाडे

“कहानी केवल मासिक पत्रिकाएँ चलानेवाली क्षुद्र साहित्यिक विधा है।”

— भालचंद्र नेमाडे

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