विचारघर

विचारघर › हिंदी साहित्यकार व कवि › भगवती चरण वर्मा

भगवती चरण वर्मा — सूक्ति व विचार

भगवती चरण वर्मा के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। भगवती चरण वर्मा के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“जीवन अविकल कर्म है, न बुझने वाली पिपासा है। जीवन हलचल है, परिवर्तन है; और हलचल तथा परिवर्तन में सुख और शांति का कोई स्थान नहीं।”

— भगवती चरण वर्मा

“निर्बल व्यक्ति की आहें संगठित होकर समुदाय द्वारा जनित क्रांति का रूप धारण कर सकती हैं।”

— भगवती चरण वर्मा

“ईश्वर अनादि है, पर उस ईश्वर को, मैं दावे के साथ कहता हूँ, कोई नहीं जानता—वह कल्पना से परे है। वह सत्य है, पर इतना प्रकाशवान कि मनुष्य के नेत्र उसके आगे नहीं खुले रह सकते। उस सत्य को जानने का प्रयत्न करो, उस ईश्वर को पाने के लिए घोर तपस्या करो, पर सब व्यर्थ है—निष्फल है। यदि तुम ईश्वर को ही जान सको, यदि तुम्हारी कल्पना में ही वह अखंड और नि:सीम अनन्त का रचियता आ सके, तो फिर वह ईश्वर कैसा?”

— भगवती चरण वर्मा

“जो ईश्वर पर विश्वास करता है, उसी में आत्मशक्ति है, नास्तिक में आत्मशक्ति नहीं होती।”

— भगवती चरण वर्मा

“जीवन का कार्यक्रम है रचनात्मक, विनाशात्मक नहीं मनुष्य का कर्तव्य है अनुराग, विराग नहीं।”

— भगवती चरण वर्मा

“धर्म समाज द्वारा निर्मित है। धर्म ने नीतिशास्त्र को जन्म नहीं दिया है, वरन् इसके विपरीत नीति-शास्त्र ने धर्मं को जन्म दिया है।”

— भगवती चरण वर्मा

“कृत्रिमता को हमने इतना अधिक अपना लिया है कि अब वह स्वयं ही प्राकृतिक हो गयी है।”

— भगवती चरण वर्मा

“उस व्यक्ति से कोई बात न छिपानी चाहिए, जिससे स्नेह हो।”

— भगवती चरण वर्मा

“संसार क्या है? शून्य है। और परिवर्तन उस शून्य की चाल है।”

— भगवती चरण वर्मा

“प्रेम बलिदान है, आत्मत्याग है, ममत्व का विस्मरण है।”

— भगवती चरण वर्मा

“उन्माद और ज्ञान में जो भेद है, वही वासना और प्रेम में है। उन्माद अस्थायी होता है और ज्ञान स्थायी।”

— भगवती चरण वर्मा

“प्रेम के क्षेत्र में अपवित्रता का कोई स्थान नहीं है।”

— भगवती चरण वर्मा

हिंदी साहित्यकार व कवि के अन्य रचनाकार