“मैं ख़रीद बैठा पीड़ा को यौवन के चिरसंचित धन से!”
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बच्चन सिंह — सूक्ति व विचार
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“तेरे दुःख से कहीं कठिन दुःख यह जग मौन सहा करता है।”
“सह सकेगी भार कितना यह नयन की नाव!”
“मैंने पीड़ा को रूप दिया, जग समझा मैंने कविता की।”
“छोटे से जीवन से की है तूने बड़ी-बड़ी प्रत्याशा।”
“मिल न पाया प्यार जिनको आज उनको प्यार मेरा।”