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अशोक वाजपेयी — सूक्ति व विचार

अशोक वाजपेयी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। अशोक वाजपेयी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“अगर कविता न होती तो राम और कृष्ण भी यथार्थ न होते।”

— अशोक वाजपेयी

“जितना कवि समय को, उतना ही समय कवि को गढ़ता है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता परम सत्य और चरम असत्य के बीच गोधूलि की तरह विचरती है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता आत्म और पर के द्वैत को ध्वस्त करती है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता सरलीकरण और सामान्यीकरण के विरुद्ध अथक सत्याग्रह है।”

— अशोक वाजपेयी

“साहित्य, लालित्य के बचाव में प्रयत्नशील बने रहने की भी भूमि है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता भाषा का भाषा में स्वराज है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता भाषा का शिल्पित रूप है, कच्चा रूप नहीं।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता समाज नहीं, व्यक्ति लिखता है, फिर भी कविता एक सामाजिक कर्म है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता का काम संसार के बिना नहीं चलता। वह उसका सत्यापन भी करती है और गुणगान भी।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता व्यक्ति को दूसरा बनाए जाने के क्रूर अमानवीय उपक्रम के विरुद्ध सविनय अवज्ञा है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता अपने सच पर ईमानदार शक करती है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता यथार्थ का बिंब भर नहीं होती। वह उसमें कुछ जोड़ती, इज़ाफ़ा करती है।”

— अशोक वाजपेयी

“कविता कवि, पाठक और श्रोता का साझा सच है।”

— अशोक वाजपेयी

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