“जड़-चेतनमय, विष अमृतमय, अंधकार-प्रकाशमय जीवन में न्याय के लिए कर्म करना ही गति है। मुझे जीना ही होगा, कर्म करना ही होगा। यह बंधन ही मेरी मुक्ति भी है। इस अंधकार में ही प्रकाश पाने के लिए मुझे भी जीना है।”
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अमृतलाल नागर — सूक्ति व विचार
अमृतलाल नागर के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। अमृतलाल नागर के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“सत्य, आस्था और लगन जीवन-सिद्धि के मूल हैं।”
“कला जीवन का रस है।”
“उदारता और स्वाधीनता मिल कर ही जीवनतत्त्व है।”