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अमृता प्रीतम — सूक्ति व विचार

अमृता प्रीतम के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। अमृता प्रीतम के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“हर कोई जब छाती में बहुत से सपने और माथे में बहुत से ख़याल डाल कर घर से ज़िंदगी ख़रीदने निकलता है, और ज़िंदगी के बाज़ार में ज़िंदगी की क़ीमत सुनता है, तो उसकी छाती में खनकते सब सिक्के बेकार हो जाते हैं।”

— अमृता प्रीतम

“एक ग़ुस्सा था रुके हुए पानी की तरह जिसके निकलने की कोई राह नहीं थी, इसलिए जहाँ वह रुका हुआ था, उन दीवारों को ही चाट रहा था।”

— अमृता प्रीतम

“जीवन बड़ा अजीब होता है। ...कई बार उसकी परतों में से हम जिस रंग को खोजते हैं, वह नहीं निकलता। पर कोई ऐसा रंग निकल आता है जो उससे भी अधिक ख़ूबसूरत होता है।”

— अमृता प्रीतम

“किसी भी ग़लत ढाँचे से रोष या घृणा स्वयं में जीवन की निशानी है, सदा रही है।”

— अमृता प्रीतम

“ज्ञान हमेशा किसी को सौंपकर जाना चाहिए।”

— अमृता प्रीतम

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