“हे देशवासी, तू अपने आप को पहचान। अपने हृदय व मस्तिष्क से काम लेकर तू परतंत्रता का दाग़ मिटा दे। तू क्रांति ला, क्रांति ला। तेरी मेहनत की कमाई से दूसरे धनवान बन रहे हैं। तू किन के सामने भटकता है और किन के भय से डरता है। अपने ख़ून-पसीने से तू जिनके लिए नींव बना रहा है, वही लोग तुझे हेय समझते हैं। हे पौरुषहीन! क्रांति ला, क्रांति ला।”
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अब्दुल अहद 'आज़ाद' — सूक्ति व विचार
अब्दुल अहद 'आज़ाद' के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। अब्दुल अहद 'आज़ाद' के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“प्रेम ने बड़े-बड़े तपस्वियों और विद्वानों की मति फेर दी है। यह कोमल व खिले यौवन को क्षण भर में मिटाकर राख कर देता है।”